श्रीनारायण
जया एकादशी के दिन भगवान नारायण की शेषशायी मूर्ति का सीताफल व सिंघाड़े से पूजन करना चाहिए तथा सिंघाड़े का सागार और गोंदगीरी का साठा बनाकर भगवान नारायण को अर्पण करें एवं इसे ही आहार के रूप में ग्रहण करें। इस तरह जया एकादशी का व्रत करने से दरिद्रता समाप्त होती है इसमें तनिक भी संदेह नहीं करना चाहिए। इस दिन धन, वस्त और छाते के दान का विधान है अतः यथा संभव इन वस्तुओं का दाम योग्य ब्राह्मण को करें।
नोट:- गोंदगीर का साठा तथा सिंगाड़े का सागार बनाने की विधि
https://youtu.be/llK3FI0-iCU?si=qiUBvMI6fmYAfRCw https://youtu.be/g0YuFuJ-YcQ?si=Nn25_ORyoIakqu7N
चूंकि इस विधि का प्रयोग उपवास में करना है अतः सिर्फ सिंगाड़ा और राजगिरे के आटे का ही उपयोग करें।