श्रीनारायण का आध्यात्मिक स्वरूप
नित्य वंदनीय, परम पूज्य
संत लोकेशानंदजी महाराज
नित्य वंदनीय, परम पूज्य संत श्री लोकेशानंद जी महाराज का पावन आविर्भाव 21 फरवरी 1980 को मध्य प्रदेश के इंदौर नगर में एक भारद्वाज गोत्रीय ब्राह्मण परिवार में प्रातः 07:05 बजे हुआ। ऐसा माना जाता है कि परमात्मा के पथ पर निरंतर अग्रसर रहने वाले भक्त पुरुष, अपनी अधूरी साधना को पूर्ण करने हेतु पुनः उत्तम कुलों में जन्म लेते हैं। उसी दिव्य परंपरा के अंतर्गत भक्तिमती माता श्री ललिता देवी के गर्भ से श्री गुरुदेव का आविर्भाव हुआ। आपके पूज्य पिता श्री वीरेन्द्र कुमार जी का देहावसान दिसंबर 2004 में हुआ।
उनका जीवन मिशन –
- व्यसनमुक्त समाज का निर्माण
- आध्यात्मिक जागरण का प्रसार
- भक्तों को भक्ति, संस्कार और सदाचार की दिशा देना
“यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत… तदा आत्मानं सृजाम्यहम्।” — श्रीमद्भगवद्गीता “जहाँ विश्वास है, वहाँ नारायण हैं। जहाँ नारायण हैं, वहाँ शांति और आनंद है।”
शेषशायी श्रीनारायण भगवान
संत श्री लोकेशानंद जी महाराज के बारे में
ईश्वर भक्त विभूतियों का समय–समय पर संत रूप में धरती पर प्रादुर्भाव होता है। भारतवर्ष की पुण्यधरा पर अनादि काल से ऐसे संत–महापुरुषों का प्रादुर्भाव हुआ है, जिनके जन्म और कर्म महान थे तथा जिनका जीवन परमात्मा–प्रीति और आत्मज्ञान से परिपूर्ण था। इन संतजनों ने धरती पर ईश्वर के नाम का प्रचार–प्रसार किया और प्रत्येक मनुष्य को ईश्वर के प्रति समर्पित होने का संदेश दिया। उन संतजनों की शिक्षाओं पर चलकर असंख्य नर–नारियों ने ईश्वर को प्राप्त किया तथा आत्मज्ञान पाकर जीवन–मुक्त हो गए। मनुष्य जन्म पाकर परमात्मा को पा लेना ही सच्ची और सबसे बड़ी उपलब्धि है। परंतु संत–सद्गुरु की कृपा के बिना कोई उस उपलब्धि तक नहीं पहुँच सकता। संतजन ही कृपा करके जीव को ईश्वर से मिलाते हैं।
प्रेरणास्रोत
हमारे प्रेरणास्रोत
भक्ति
श्रीनारायण के प्रति अटूट प्रेम और विश्वास
संस्कार
समाज में शांति, अनुशासन और सदाचार का प्रसार
सेवा
गौसेवा, योग शिविर, पर्यावरण सुरक्षा, व्यसन मुक्ति अभियान
“भक्ति से समाज का निर्माण।”
दिव्य दर्शन एवं सत्संग
श्रीनारायण भक्ति पंथ समाज में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक उत्थान के लिए सतत कार्यरत है।
- शेषशायी नारायण
शेषशायी श्रीनारायण भगवान मंदिर
- महाराष्ट्र के शहादा में निर्माणाधीन दो लाख वर्गफुट क्षेत्र का भव्य मंदिर।
- ग्यारह फुट ऊँचा पंचधातु शेषशायी नारायण श्रीविग्रह (21 टन वज़न) विश्व का पहला ऐसा श्रीविग्रह होगा।
- मंदिर का पूरा निर्माण पत्थर से, बिना लोहे के किया जा रहा है।
- भक्त तन-मन-धन से इस दिव्य सेवा में जुड़ रहे हैं।
- शेषशायी श्रीनारायण भगवान मंदिर
विशेषताएँ
- विश्व का पहला इक्कीस टन वज़न का पंचधातु शेषशायी नारायण श्रीविग्रह।
- लोहे का उपयोग किए बिना पूर्णतः पत्थर से निर्मित।
- अद्भुत शिल्पकला एवं नक्काशी।
- पर्यावरण-अनुकूल और सनातन परंपरा का संगम।
- शेषशायी नारायण भगवान मंदिर
स्थान और पहुँच
- मध्य प्रदेश सीमा – 15 किमी
- गुजरात सीमा – 25 किमी
- इंदौर – 225 किमी
- सूरत – 200 किमी
- नज़दीकी रेलवे स्टेशन – नंदुरबार (30 किमी), दोंडाईचा (25 किमी)

15 किमी
25 किमी
225 किमी
200 किमी
नंदुरबार (30 किमी), दोंडाईचा (25 किमी)
शेषशायी श्रीनारायण मंदिर
- शेषशायी नारायण
शेषशायी श्रीनारायण भगवान मंदिर का स्थान
SNBP (श्रीनारायण भक्ति पंथ) समाज को सशक्त एवं संगठित बनाने के लिए निम्न क्षेत्रों में कार्य करता है —
श्री श्री नारायण पुरम तीर्थ
श्री नारायण भक्ति पंथ – SNBP
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